सत्य प्रेम के जो हैं रूप उन्हीं से छाँव.. उन्हीं से धुप. Powered by Blogger.
RSS

♥ चाहत का मेरी तूं गम न कर ♥

राह तकती निगाहें 
साँसें भरती आहें 
लगा ले सीने से 
फ़ैला दे अपनी बाहें 
दिल की तड़प को 
अब न तड़पा 
इक बार देख मुड़के
ज़रा सा मुस्कुरा 

चाहत का मेरी तूं
गम न करना 
बस एक निगाह 
इधर भी देख लेना 
विरह की ये अगन
मैं सह लूंगी
साँस छोड़ दूंगी 
तेरा साथ न छोडूंगी 



  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

0 comments:

Post a Comment