सत्य प्रेम के जो हैं रूप उन्हीं से छाँव.. उन्हीं से धुप. Powered by Blogger.
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तुम संग___|||

तुम्हारा स्पर्श
और वो सुक़ून
भरा अहसास
मैं आज भी
महसूस करती हूँ
मूंद आँखों को मैं
आज भी तुम्हें जीती
हूँ
मेरे उदास लम्हों में
मेरी तन्हाई के पलों में
होते हो तुम मेरे
बेहद करीब
मुस्कुराते हुए
बाँहों में अपनी मुझे
समाये हुए

मैं नही चाहती
पलकेँ उठाना
मैं नही चाहती
ख़्यालों से जगना
मैं चाहती हूँ तुम्हें
जी भर देखना
मैं चाहती हूँ तुमसंग
बस यूँही जीना

ये जो आँसू हैं
मेरी आँखों में
तेरी चाहत की
निशानी है
ये जो आह
तड़प है
मेरे सीने में
हमारे प्यार की
कहानी है

इक जनम तो होगा ऐसा
जो तू मेरे करीब होगा
होगी फ़िक्र मेरी भी तुझे
जब तू मेरा नसीब होगा__|||🌷

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