सत्य प्रेम के जो हैं रूप उन्हीं से छाँव.. उन्हीं से धुप. Powered by Blogger.
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कैसे मुस्काऊँ सज़ना के भर आएं अँखियाँ

नाम तेरा लव पे है साजन
उसपे ये तन्हाई का आलम 
कैसे मुस्काऊँ सज़ना 
के भर आएं अँखियाँ  
लागे  न जिया मोरा 
ओ मोरे बलमा
जाने ना तूं मेरा 
दर्द सजनवा 
लौट के आजा 
ओ मोरे राजा
भर ले बाँहों में मुझे 
ओ दिलज़ानियां
दिल में समाया जब से 
चैन ना आया मुझे 
पल पल जुदाई का डर
हर पल खाया मुझे 
कर दिया सच तूने 
सपना ये कैसा 
कैसे मुस्काऊँ साज़न 
उज़ड़ा ये दिल का आँगन
रोये ये नैना निशदिन 
तड़पे दिल प्रीतम तुम बिन 
याद ना तुमको आई 
कैसी  ये प्रीत निभाई 
भूल जाऊं मैं भी तुझे 
करूँ क्या जतनवा
करूँ क्या जतनवा
बुझे ना जानम तुम बिन 
दिल का अगनवा 
कैसे मुस्काऊँ तुम बिन 
करूँ क्या जतनवा 
करूँ क्या जतनवा 

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